खूंटी. अड़की प्रखंड के लोंंगकाटा जंगल में मंगलवार को पुलिस एवं पीएलएफआई उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ में मारे गए पांचों पीएलएफआई उग्रवादियों की पहचान हो गई है। उधर, कोबरा को मिली बड़ी सफलता में जवानों का हौसला अफजाई करने के लिए गुरुवार को सीआरपीएफ के डीजीपी राजीव राय भटनागर आएंगे। सीआरपीएफ के डीजीपी राजीव राय भटनागर कोबरा कैंप में मुठभेड़ में शामिल जवानों को गुरूवार को सम्मानित करेंगे। इस अवसर पर सीआरपीएफ के आईजी, डीआईजी समेत कई आला अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। डीजीपी के आने की सूचना कोबरा के पदाधिकारियों ने दी है।
बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मारे गए पांचों उग्रवादियों की मजिस्ट्रेट विजय कुमार की देखरेख में तीन डॉक्टरों की टीम के द्वारा पोस्टमॉर्टम कराया गया। पुलिस प्रशासन द्वारा पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। लेकिन शव की शिनाख्त करने एवं शव प्राप्त करने के लिए मात्र दो के परिजन ही आए। 9 माह के बेटे को गोद लेकर प्रभुसहाय बोदरा की पत्नी बिंदिया एवं संजय ओड़ेया के पिता समेत सभी भाई बहन शव प्राप्त करने के लिए पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। सभी उग्रवादियों के शव बुधवार की दोपहर एक बजे मुरहू थाना से पोस्टमॉर्टम हाउस लाए गए।
यहां डॉक्टर आर प्रसाद, डॉ. पीपी शाह एवं डॉ. सुरजीत लकड़ा की टीम ने सभी शवों का पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट के रूप में मौजूद अंचलाधिकारी विजय कुमार के समक्ष किया गया। इस दौरान पोस्टमार्टम हाउस के आसपास पुलिस ने कड़ी सुरक्षा कर रखी थी। पोस्टमार्टम की पुरी प्रक्रिया का वीडियोग्राफी भी की गई।
दो लाख के इनामी एरिया कमांडर प्रभु सहाय बोदरा उर्फ सोमा बोदरा की पत्नी बिंदिया बोदरा ने बताया कि उनका विवाह वर्ष 2014 में हुआ था। उसके एक नौ माह का बेटा भी है। बिंदिया ने बताया कि उसे मालूम था कि उसका पति उग्रवादियों के साथ काम करता था। बच्ची के भविष्य को लेकर कई बार उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन उसने कभी उसकी बात नहीं मानी। उसने बताया कि प्रभु सहाय हमेशा बाहर ही रहता था। कभी-कभी ही घर आता था। गत 25 दिसंबर को वह घर आया था लेकिन दूसरे दिन ही चला गया था। पीएलएफआई के एरिया कमांडर प्रभु सहाय बोदरा की पत्नी ने कहा कि उसके सामने उसके 9 महीने के बच्चे का लालन पालन की समस्या आ खड़ी हुई है। हालांकि ज्यादा कुछ कहने से इंकार कर दिया।
मुठभेड़ में मारा गया संजय ओड़ेया जिस युवती के अपहरण के मामले में एक साल जेल में रहा उसी से कुछ दिन बाद उसकी शादी भी होने वाली थी। जिस लड़की को संजय चाहता था उसी का उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण कर लिया था। मुठभेड़ में घायल प्रवीण मुंडा ने भी लड़कियों के अपहरण में संजय ओड़ेया का साथ दिया था। दोनों मिलकर खूंटीटोला की तीन लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ जंगल ले गए थे। पुलिस की जबरदस्त दबाव के कारण उन्होंने तीनों लड़कियों को मुरहू में छोड़ दिया था। तीनों लड़कियां टेंपो पकड़कर खूंटी आई थी। इसी अपहरण की घटना में पुलिस ने संजय ओड़ेया को खूंटी के एक स्कूल से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। अदालत ने नाबालिग जानकर अभियुक्त को रिमांड होम भेज दिया था। रिमांड होम से 13 दिसंबर को वह रिहा हुआ था। एवं रिहाई के बाद अपने उसी प्रेमिका के साथ रह रहा था। संजय के परिजनों ने बताया कि कुछ दिनों बाद ही संजय एवं उक्त लड़की की शादी भी होने वाली थी। उससे पहले ही पुलिस एवं पीएलएफआई के मुठभेड़ में संजय ओड़ेया मारा गया। संजय मूल रूप से मुरहू के डहकेला का रहने वाला था परिजनों ने बताया कि आखरी बार 28 जनवरी को उसकी मुलाकात परिजनों से हुई थी। वह छह भाई बहनों में पांचवें नंबर पर था।
अड़की प्रखंड के लोंगकाटा जंगल में मुठभेड़ के दूसरे दिन भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया। मंगलवार को पुलिस एवं पीएलएफआई उग्रवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी जिसमें पुलिस एवं कोबरा के जवानों ने पीएलएफआई के 5 उग्रवादियों को मार गिराया था एवं दो उग्रवादियों को घायल अवस्था में गिरफ्तार किया था। जिला पुलिस एवं 209 कोबरा बटालियन के संयुक्त कार्रवाई में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी थी। पुलिस को प्रभु सहाय बोदरा के साथ दीत नाग की भी सूचना मिली थी। इसी सूचना पर पुलिस ने अभियान चलाया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वहां दीत नाग के होने की पक्की सूचना मिली थी। दीत नाग के साथ उसकी प्रेमिका भी वहां मौजूद थी। लेकिन गोली चलने के साथ ही दीत नाग अपनी प्रेमिका के साथ वहां से भाग खड़ा हुआ। दीत की तलाश में बुधवार को भी लोंगकाटा जंगल के आस-पास सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
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