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हेल्थ रिपोर्टर
रांची
दो से तीन साल की उम्र तक बच्चे का रात में सोते हुए बिस्तर गीला करना सामान्य है। यदि इस उम्र के बाद भी वह यूरीन लीक कर रहा है तो यह नुकसानदायक हो सकता है। विशेषकर उन केसों में जब बच्चे का एक बार यूरीन लीक करना बंद हो चुका है। एक से दो साल के गैप के बाद उसने दोबारा यूरीन लीक करना शुरू कर दिया है। इसे बच्चे की सामान्य आदत मानते हुए नजरअंदाज नहीं करें। ऐसी स्थिति में, ब्लाडर से यूरीन पूरी तरह से नहीं निकल पाता है। यह किडनी तक पहुंच जाता है। इससे किडनी खराब हो सकती है। इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि समय पर बीमारी डायग्नोस कर इलाज शुरू हो पाए। किडनी को खराब होने से बचाया जा सके। रात में ही बच्चे का यूरीन लीक करना एन्यूरेसिस और दिन-रात में लीक करना डायलुरेसिस कहलाता है।
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बच्चों की प्रॉब्लम
लगभग साठ परसेंट बच्चों में यूरीन लीक करते हैं। एक से दो साल में यह ठीक हो जाती है। फिर वापस शुरू हो जाता है। पूरी तरह से बच्चे का ब्लेडर खुल नहीं पाता है।
दोबारा लीकेज के रिस्क फैक्टर
किसी तरह का विकार, निचले हिस्से में बालों का गुच्छा या लहसुन जैसी गांठ बनना। इनकी वजह से यूरीन का दोबारा लीकेज शुरू हो जाता है। इनमें चलते-फिरते ही यूरीन लीक हो जाता है। डायग्नोस के दौरान बच्चे के साथ-साथ पेरेंट्स की हिस्ट्री लेते हैं। यह मालूम चल पाए कि पेरेंट्स को प्रॉब्लम तो नहीं है। यहां तक कि यूरीन की धार पर भी फोकस करना चाहिए। ब्रेन के सिग्नल पर ब्लेडर संकुचित होता है। इसमें यूरीन भरता और निकलता है। किसी तरह की बीमारी होने पर ब्लेडर से पूरी तरह यूरीन नहीं निकल पाता है। इसके ठीक होने की संभावना बहुत कम होती है। कई बार यह प्रॉब्लम 17-18 साल की उम्र तक रहती है। कभी-कभी न्यूरोजनिक ब्लेडर होने से भी यूरीन पूरी तरह से नहीं निकल पाता है। इसके चलते किडनी खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। यह छह से सात साल तक चलता रहता है। इसमें पेशाब की थैली खाली नहीं हो पाने के कारण यह मोटी बन जाती है। इससे गुर्दे में यूरीन जाने से यह खराब होने लगता है। प्राइमरी स्टेज पर दवाइयों से ठीक कर सकते हैं। अल्ट्रासाउंड से थैली का स्टेट्स मालूम करें, इसमें यूरीन भरा हुआ है या नहीं। या फिर ब्लेडर की बनावट में प्रॉब्लम नहीं है।
बचाव के तरीके: बच्चे काे रात में पानी, चाय-कॉफी पिलाकर नहीं सुलाएं। ।
-डॉ. प्रेम कुमार, यूरोलॉजिस्ट, रांची
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