{content: हेल्थ रिपोर्टर
रांची
20 से 40 साल की उम्र हेल्दी पीरियड है। इस पीरियड में आंख की बीमारी सबसे कम होती है, लेकिन कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने से कंप्यूटर सिंड्रोम हो सकता है। स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिताने से इस उम्र में चश्मे का नंबर आना शुरू हो सकता है। ज्यादातर लोग चश्मा अवॉइड करके लेसिक सर्जरी पसंद करते हैं। लेसिक से कुछ सालों के लिए नंबर हट जाता है। इससे आंखों को नुकसान पहुंचता है। इस सर्जरी के बाद आंखें ड्राई हो सकती हैं। यानी टियर सीक्रेशन कम होना शुरू हो जाता है। यहां तक कि तीन से चार साल बाद नंबर भी दोबारा आ जाता है। कुछ साल बाद कॉर्निया इतना पतला हो जाता कि वह लैंस के आगे तक आ सकता है। यह आंख के लिए खतरनाक स्थिति हो सकती है। इसलिए नंबर हटवाना अवॉइड करें। नंबर आने पर चश्मा लगाएं।
तीस से पैंतालीस मिनट बाद कंप्यूटर पर से उठ जाएं : कंप्यूटर सिंड्रोम के अलावा चोट लगने, एक्सीडेंट इंजरी और मायोपिया के कारण भी नंबर आ सकता है। कंप्यूटर की हाइट आंखों की हाइट से थोड़ा नीचा रखना चाहिए। बैकग्राउंड की लाइट कम व ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सीट पर बैठे हुए इस तरह काम करें कि थाई मसल्स पर दबाव नहीं पड़े। तीस से पैंतालीस मिनट बाद कंप्यूटर पर से उठ जाएं।
-डॉ. रणजीत सिंह, पूर्व नेत्र सर्जन, रिम्स, रांची
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