धनबाद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत रविवार को आम लोगों को संबोधित करेंगे। मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में दोपहर 2:30 बजे से क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन के 14वें सत्र में सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास भी शामिल होंगे। यातायात व्यवस्था में कुछ रास्तों को वनवे किया गया है तो कुछ जगहों पर रूट डायवर्ट किया गया है।
राज्यपाल करेंगी क्रीड़ा केंद्र का उद्घाटन
मोहन भागवत सेंट जेवियर्स इंटरनेशनल स्कूल में मेजर ध्यान चंद क्रीड़ा केंद्र का उद्घाटन करेंगे। अर्जुन अवार्डी खिलाड़ियों से मिलेंगे। वहीं, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू 11:30 बजे इसी स्कूल में द्रोणाचार्य क्रीड़ा केंद्र का उद्घाटन करेंगी।
शिक्षा देना व्यवसाय नहीं
इससे पूर्व शनिवार को धनबाद पहुंचे मोहन मधुकर भागवत क्रीड़ा भारती के पहले दिन के राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल हुए। उन्होंने कहा- शिक्षा सब को सुलभ हो। शिक्षा देना व्यवसाय नहीं। शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता होनी चाहिए। आज शिक्षा लेने वालों और देने वालों की संख्या बढ़ी है। वे यहां यहां नए भवन (हरदेव राम मिताथलिया भवन) के लोकार्पण के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
शिक्षा का मूल्यांकन पैसे या डिग्रियों से नहीं होना चाहिए
उन्होंने कहा कि हम मनुष्य हैं और हमें सबसे मनुष्य जैसा व्यवहार करना चाहिए, यही मनुष्यता का मूल मंत्र है। समय जैसे-जैसे बदल रहा है, वैसे-वैसे शिक्षा की तकनीकी भी बदल रही है। हमें हमेशा ध्यान रखना होगा कि हम जिस काम को करें, उसे उत्तम से उत्तम करना हमारा लक्ष्य हो। शिक्षा केवल पाठ्यक्रम नहीं है, वह मनुष्य के लिए संस्कार देने वाली हो। आज लोग रोटी, कपड़ा और मकान से ज्यादा महत्व शिक्षा को देते हैं। शिक्षा का मूल्यांकन पैसे या डिग्रियों से नहीं होनी चाहिए। मौके पर उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक सिद्धनाथ सिंह, विद्या भारती के मार्गदर्शक ब्रह्मदेव शर्मा भाई जी, विद्यालय के अध्यक्ष शंकर दयाल बुधिया, मंत्री विनोद कुमार तुलस्यान, निदेशक फूल सिंह मौजूद थे।
क्रीड़ा भारती के चिंतन सत्र में कोच बन किया प्रेरित
संघ प्रमुख शनिवार को क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन चिंतन सत्र को संबोधित किया। वे कोच बन खिलाड़ियों को प्रेरित करते नजर आएं। खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वह लक्ष्य को सामने रखकर परिश्रम करें, तभी भारत को खेल के क्षेत्र में परम वैभव पर पहुंचा सकते हैं। उन्होंने सफलता के पांच सूत्र बताएं। उन्होंने कहा कि विचार, लक्ष्य, धैर्य, अनुशासन और नसीब... यह पांच सूत्र हैं। जिसे अपना कर हम देश को खेल के क्षेत्र में अलग पहचान दिला सकते हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य तय करना अपने हाथ में हैं। धैर्य और अनुशासन का भी पालन कर लेंगे, लेकिन नसीब अर्थात भाग्य अपने हाथ में नहीं है। भाग्य के भरोसे बैठे रहने से मंजिल को प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today , title:Dainik Bhaskar, url: http://bit.ly/2EWSenl , author: ns.support@dainikbhaskar.com (Dainik Bhaskar) , feed_url: http://bit.ly/1PKwoAf, }
0 yorum:
Yorum Gönder