रांची (राजीव कुकरेजा).पहली बार प्रॉफिट में पहुंचे मेकॉन को जल्द ही इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) में मर्ज कर दिया जाएगा।औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कामकाज और तौर तरीकों में दक्षता लाने के लिए एक जैसी कंपनियों का विलय जरूरी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने मेकॉन के अलावा 5 अन्य कंपनियों के ईआईएल में विलय पर मुहर लगा दी है। छह कंसल्टेंसी फर्मों को एक मेगा कंसल्टेंसी फर्म बनाने के लिए ईआईएल में विलय किया जाना है।
केंद्रीय इस्पात मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद मेकॉन में कार्यरत अफसरों, इंजीनियरों और कर्मचारियों से उनकी राय मांगी गई। मेकॉन का जायजा लेने के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के 4 वरिष्ठ अफसरों की टीम भी रांची आई थी। मेकॉन 1487 कर्मचारियों वाली व ईआईएल पब्लिक सेक्टर की 3000 कर्मचारियों की महारत्न कंपनी है। मेकॉन के अधिकांश कर्मचारियों की राय ईआईएल के बजाए सेल या एनएमडीसी से जुड़ने में है। मर्जर की राय जानने के लिए मेकॉन के सीएमडी ने पिछले दिनों मेल भेज कर सभी विभागाध्यक्षों और उनके अफसरों और इंजीनियरों से अपना मंतव्य लेने के बाद एक्जीक्यूटिव एसोसिएशन के पदाधिकारियों से भी विचार विमर्श किया है।
उधर, एचईसी के टेकओवर की प्रक्रिया भी जारी है
परमाणु उर्जा मंत्रालय द्वारा एचईसी के टेकओवर का मामला साफ हो गया है। इसकी पुष्टि एचईसी के सीएमडी अभिजित घोष ने भी की है। शनिवार को उन्होंने कहा कि एचईसी टेकओवर का मामला प्रोसेस में है। हाल ही एचईसी को देखने के लिए भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से तीन सदस्यीय टीम रांची आई थी। टीम ने इंजीनियर और वैज्ञानिकों ने एचईसी मुख्यालय में सीएमडी और उनकी टीम के साथ मीटिंग की
मेकॉन इस्पात मंत्रालय का थिंक टैंक है। केवल इस्पात ही नहीं मेकॉन को माइनिंग, रेलवे, वायर समेत अन्य क्षेत्रों में भी महारत हासिल है। ईआईएल भले ही वैल्यू में मेकॉन से बड़ी कंपनी है, लेकिन वह आयल एंड नेचुरल गैस तक ही सीमित है। विलय के बाद मेकॉन उसका विंग बनकर रह जाएगा। मेकॉन अपने कर्मचारियों को दो वर्ष छोड़कर लगातार डिविडेंट देता आ रहा है। अधिकतर एम्पलाइज की राय है कि मेकॉन का अपना अलग अस्तित्व बना रहे। - संजीव कुमार, महाप्रबंधक कार्पोरेट अफेयर्स मेकॉन
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