{content: सिल्ली थाना अंतर्गत सारजमडीह गांव में चल रहे वर्षों पुराने पत्थर खदान 2019 के बाद बंद हो जाएगा। उस खदान का नवीकरण नहीं हो सकता। उक्त बाते जिला खनन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने कही। ज्ञात हो कि सारजमडीह खदान लगभग 50 वर्ष पुराना है। वहीं इस खदान से निकले वाले पत्थर की मांग भी अधिक है, क्योंकि यह अपने क्षेत्र का एकमात्र सफेद पत्थर का खदान है। यहां पत्थर की मांग पश्चिम बंगाल समेत सिल्ली, सोनाहातु आदि जगहों में ज्यादा है। पहले उक्त खदान मंगल महतो के नाम से था, बाद में उनके पुत्र धनीराम महतो के नाम से चलने लगा। सारजमडीह जंगल से सटा उक्त खदान से जंगल के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है एवं लीजधारकों के द्वारा कई मानको को भी पुरा नहीं किया जा रहा है। इसको देखते हुए उसके लीज की नवीकरण न करने का निर्णय लिया गया है। क्योंकि खदान में पत्थर तोड़ने के लिए ब्लास्ट किया जाता है। सावधानी बरतने के बावजूद ध्वनि प्रदूषण को रोका नहीं जा सकता है। पूर्व में नवीकरण के लिए इस तरह का कोई प्रावधान नहीं था इसलिए उनका लीज चल रहा था। 2019 में उनका लीज समाप्त हो जायेगा। उक्त खदान बंद होने से गांव के कई मजदूर के सामने रोजी रोजगार की समस्या आन पड़ेंगी।
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