रांची. झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट का हश्र भी मोमेंटम झारखंड जैसा ही होगा। जिस समिट को सरकार किसानों का महाकुंभ बता रही है। दरअसल, वह सरकारी डोभा है। इस समिट के आयोजन से किसानों व झारखंड को तो कुछ लाभ नहीं होगा। बल्कि यह केवल सरकारी पैसों का दुरूपयोग व बंदरबांट भर के सिवाय कुछ नहीं है।
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उन्होंने कहा- सरकार द्वारा 16-17 फरवरी, 2017 को मोमेंटम झारखंड के आयोजन के दौरान 11 हजार देशी-विदेशी डेलीगेट्स की मौजूदगी में 3.10 लाख करोड़ के 210 एमओयू कर निवेश के बड़े-बड़े दावे किए गए। आज 21 माह गुजरने के बाद भी एक भी एमओयू पूर्णतः जमीं पर उतर नहीं पाया है। केवल कुछ कंपनियों की धीमी गति से काम चल रहा है।
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योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा- वहीं, मोमेंटम झारखंड के दौरान 6 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मुहैया कराने का दंभ भरा गया था। परंतु कुछ हजार लोगों को ही रोजगार का लाॅलीपाॅप थमा दिया गया है। ग्लोबल समिट में भी 271 करोड़ के 50 प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया और लगभग 5700 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा- जब मोमेंटम झारखंड का उड़ता हाथी धड़ाम से गिर गया तब इस छोटे आयोजन का क्या हश्र होगा, समझा जा सकता है। राज्य में लगातार किसान आत्महत्या कर रहे हैं, किसानों के हित में सरकार कोई महत्वकांक्षी योजना चलाने की बजाय सरकार केवल किसानों व राज्य की जनता को गुमराह करने का काम कर रही है। मोमेंटम झारखंड की नाकामी के लिए सरकार को जनता से माफी मांगते हुए दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। वैसे जनता 2019 में सारा हिसाब कर लेगी।
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