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विधानसभा में शुक्रवार को सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर और स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। दोनों ने एक-दूसरे की काबिलियत पर सवाल उठाया। चंद्रवंशी ने किशोर से कहा-आपको ज्यादा काबिल नहीं बनना चाहिए। सबको अपने जैसा समझते हैं। सवाल घुमा-फिरा कर क्यों पूछ रहे हैं। सीधे पूछिए, क्या पूछना चाहते हैं। काबिल मत बनिए। डाटा चाहिए तो देंगे। जवाब में किशोर ने कहा-मंत्री पद की गरिमा बनाकर रखिए। आप कितने काबिल हैं, यह सभी को पता है। पूरे राज्य को पता है कि आप कैसे मंत्री हैं। सदन में अल्पसूचित प्रश्न के समय किशोर ने सवाल उठाया कि 5 साल की आयु के 45% शिशु कुपोषण व 70% शिशु एनिमिया के कारण बीमार हो रहे हैं। सरकार क्या कार्रवाई करना चाहती है। चंद्रवंशी ने कहा-95 कुपोषण उपचार केंद्र संचालित हैं। 46,543 बच्चों का सफल इलाज हो चुका है। एनीमिया रोकथाम के लिए सघन राष्ट्रीय आयरन प्लस इनिशियेटिव क्रियान्वित किया गया है। तब किशोर बोले-इतनी योजना चलने पर भी कुपोषण हो रहा है तो साफ है कि सरकार का दोनों प्रोग्राम फेल है।
चंद्रवंशी बोले-ज्यादा काबिल न बनिए, सीधे-सीधे सवाल पूछिए
किशोर का जवाब-आप कितने काबिल हैं, पूरे राज्य को पता है
स्पीकर ने पूछा-पहली बार मंत्री कब बने थे, चंद्रवंशी बोले-बिहार में जब 54 जिले थे, तब 1995 में
स्पीकर दिनेश उरांव ने स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी से पूछा-आप पहली बार मंत्री कब बने थे। चंद्रवंशी ने जवाब दिया - अविभाजित बिहार में जब 54 जिले थे, तब 1995 में ही मंत्री बने थे। बिहार में मंत्री बनना आसान नहीं है। यह भी इनको नसीब नहीं हुआ। दोनों के बीच नोक-झोंक के दौरान कई और बातें हुईं, जिसे संसदीय कार्यमंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के आग्रह पर स्पीकर ने कार्यवाही से निकालने का नियमन कर दिया।
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