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हेल्थ रिपोर्टर
रांची
वायरल इंफेक्शन या दवाइयों के साइड-इफेक्ट्स की वजह से शरीर का बैलेसिंग सिस्टम बिगड़ चुका है। व्यक्ति सामान्य चाल नहीं चल पा रहा है। वह लड़खड़ाता हुआ चल रहा है। शरीर का संतुलन नहीं बना पा रहा है। अब उसे उम्रभर लड़खड़ाते हुए नहीं चलना पड़ेगा, क्योंकि हाल ही में ऐसा आर्टिफिशियल बैलेंसिग ऑर्गन बनाया गया है, जो कॉकलियर इंप्लांट की तरह काम करेगा। ब्रेन से सिग्नल पैदा करके शरीर में भेजेगा। जिससे व्यक्ति को सामान्य चाल चलने में मदद मिलेगी। यह एक तरह का इंप्लांट है। इसे कान के अंदर एक सेंटीमीटर में इंप्लांट किया जाता है। इसका सेंसर खोपड़ी की स्किन के नीचे लगाते हैं। कान में लगी यह डिवाइस अंदर की नर्व से कनेक्ट होती है।
दोनों साइड का सिस्टम डिस्टर्ब होने पर इंप्लांट ही इलाज
इसमें लगा हुआ एंप्लीफायर इलेक्ट्रिकल सिग्नल बनाता है। सिग्नल बनने पर सेंसर काम करना शुरू करता है। सेंसर शरीर की हलचल को पहचानते हुए इसे सिग्नल देता है। इससे व्यक्ति की चाल में सुधार आता है। उसकी लड़खड़ाहट में सुधार आता है। वह सामान्य व्यक्ति की तरह चल पाता है। वेस्कुलर सिस्टम में होने वाली खराबी से अक्सर यह परेशानी होती है। एक तरह का बैलेसिंग सिस्टम डिस्टर्ब होने पर फिजियोथेरेपी और दवाइयों से इलाज संभव है, लेकिन दोनों साइड का सिस्टम डिस्टर्ब हाेने पर दवाइयों से इलाज नहीं हो पाता है। ऐसे केस में, यह इंप्लांट ही इलाज का बेहतरीन विकल्प है। यह इंप्लांट लगाने के बाद पेशेंट की स्थिति में 40-70 परसेंट सुधार आ पाएगा। वो सामान्य जिंदगी जी पाएगा।
क्यों होता है बैलेंसिग डिसऑर्डर
सामान्य जिंदगी जीने और संतुलित चाल के लिए वेस्कुलर सिस्टम व विजन का सही होना जरूरी है। जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी से यह डिस्टर्ब हो जाता है। या फिर कारणवश इनर इयर डैमेज होने से भी यह बीमारी हो सकती है। आइसीयू में दी जाने वाली कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स की वजह से इसमें खराबी हो सकती है। उम्र के साथ यह सिस्टम कमजोर पड़ने पर भी ऐसा होता है। इसकी शुरुआत वरटिगो बीमारी से होती है। आखिरी स्टेज पर पैरों में लड़खड़ाहट आना शुरू हो जाती है।
डिसऑर्डर बेल्ट में लगे ब्राइवेटर बताएंगे किस तरफ गिर सकता है पेशेंट
कमर पर बेल्ट बांधकर लड़खड़ाहट से बचा जा सकता है। इस बेल्ट पर चारों तरफ ब्राइवेटर लगे होते हैं। ये सेंसर से जुड़े होते हैं। यदि व्यक्ति दाहिने तरफ लड़खड़ा रहा है तो इस साइड के सेंसर ऑन हो जाएंगे। जिस तरह मोबाइल ब्राइवेट करता है। वैसे ही ये ब्राइवेटर स्किन पर ब्राइवेट करेंगे। इससे पेशेंट को यह मालूम चल पाएगा कि वो दाईं तरफ गिर सकता है। वो सीधा होकर चलना शुरू कर देगा। इसी तरह बांई तरफ लड़खड़ा रहा है तो बांई तरफ का सेंसर ऑन हो जाता है।
सेंसर ऑन हो जाएगा, माइंड पर भी पड़ेगा पॉजिटिव असर: बढ़ती उम्र के साथ वेस्कुलर सिस्टम कमजोर पड़ता है। ओल्ड एज में वेस्कुलर सिस्टम अच्छा नहीं होने से व्यक्ति का संतुलन खराब होता है। वह गिर सकता है। इसलिए इन लोगों को धीरे-धीरे संभलकर चलना चाहिए। अचानक से मुड़े नहीं। धीरे-धीरे मुड़े। व्यक्ति के गिरने से फ्रैक्चर हो सकता है। यहां तक कि वेस्कुलर राइनाइटिस व हर्पीज इंफेक्शन भी कानों की नसों को डैमेज कर देता है। तुरंत ट्रीटमेंट शुरू करने पर रिलीफ मिलता है। वरटिगो होने पर इनर इयर में सर्कुलेशन बढ़ाने व सप्रेस करने की दवाइयां दी जाती है। सप्रेस करने की दवाइयां दो दिन से ज्यादा नहीं लें। इससे ब्रेन को एडजस्ट करने में परेशानी होती है। -डॉ. सीबी सहाय, न्यूरोलॉजिस्ट, रांची
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