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1 Şubat 2019 Cuma

जो बच्चा मां से बिना पूछे खेलने भी नहीं जाया करता था, वह उग्रवादी कैसे हो सकता है: मृतक की मां

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खूंटी. जो बच्चा मां से बिना पूछे खेलने भी नहीं जाया करता था, वह उग्रवादी कैसे हो सकता है। यह कहना है 29 जनवरी को पुलिस एवं पीएलएफआई उग्रवादियों के बीच एनकाउंटर में मारे गए संत थामस सोय की मां पौलिना सोय का। अड़की थाना क्षेत्र के नारंगा गांव में दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि पौलिना सोय ने कहा कि वे लोग सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं।

  1. इसी स्कूल में पढ़ता था मृतक।

    उन्होंने कहा कि 21 जनवरी को भी उसने मुचिया में चल रहे पर हॉकी प्रतियोगिता देखने जाने की बात कहकर घर से गया था। उसने यह भी कहा था कि 22 जनवरी से वह स्कूल भी पढ़ने जाएगा। परंतु 21 जनवरी के बाद वह घर लौटा ही नहीं। 31 जनवरी को उसका शव देखा। थॉमस की मां पौलिना सोय ने बताया कि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 20 मार्च 2006 है। स्कूल एवं आधार कार्ड में 2 वर्ष घटाकर 2008 किया गया है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग अपने बच्चों की वास्तविक उम्र घटाकर ही स्कूलों में लिखते हैं। संत थॉमस सोए के पिता सबन सोए गांव के स्कूल में ही पारा शिक्षक थे। कुछ दिन पूर्व स्कूलों के विलय से उनका स्थानांतरण कुछ दूर हुआ है। थॉमस भी उन्हीं के स्कूल उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बुरुटोला में दूसरी कक्षा तक पढ़ाई की है। उसके बाद इसी विद्यालय से निर्गत विद्यालय स्थानांतरण प्रमाण पत्र के आधार पर मुुरहू के संत जॉन मिडिल स्कूल में उसका नाम लिखाया गया। पिता सबन सोय ने कहा कि हर कोई थोड़ा उम्र घटाकर लिखता है। उसी क्रम में 2006 से 2008 किया गया।

  2. परिजनों से पूछताछ करती पुलिस।

    थॉमस के क्लास टीचर मंजुल प्रभात बारला ने भी कहा कि थॉमस उन्हीं के क्लास में पढ़ता था। उन्होंने कहा कि अन्य बच्चों की तुलना में उसकी उपस्थिति थोड़ी कम रहती थी, पर वह स्कूल अवश्य आया करता था। वहीं स्कूल के प्रिंसिपल इस्राइल मुुंडू ने कहा कि संत थॉमस सोय का नामांकन दूसरे क्लास में वर्ष 2016 को किया गया था। उन्होंने बताया कि थॉमस अंतिम बार स्कूल 7 दिसंबर को आया था। प्रिंसिपल इसराइल मुंंडू ने कहा कि कद काठी से हटा कटा होने के कारण वह अन्य बच्चों की तुलना में थोड़ा बड़ा दिखता था। लेकिन उसकी उम्र 14 -15 वर्ष से अधिक नहीं है।

  3. नारंग स्थित छात्र संत थोमस का घर।

    मुठभेड़ में स्कूली छात्र की मौत पर विवाद बढ़ता देख पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है। हालांकि खूंटी एसपी आलोक ने छात्र के आधार कार्ड को फर्जी तक बता दिया है। शुक्रवार को इस पूरे माले की जांच में खूंटी थाना प्रभारी राजेश प्रसाद रजक एवं मुरहू थाना प्रभारी उदय कुमार गुप्ता को लगाया गया है। मुरहू थाना प्रभारी उदय कुमार गुप्ता संत थॉमस सोय के स्कूल संत जॉन मिडिल स्कूल जाकर उसके संबंध में तहकीकात की। इसी क्रम में थाना प्रभारी ने स्कूल जाकर एडमिशन रजिस्टर समेत उपस्थिति रजिस्टर को खंगाला। वहीं खूंटी थाना प्रभारी राजेश प्रसाद रजक दोपहर तीन बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ नारंगा गांव पहुंचे। वहां उन्होने संत थोमस सोय के घर जाकर परिजनों पूछताछ की। एवं उसके संबंध में जानकारियां इकट्ठी की। अड़की प्रखंड के सीमांत इलाके में नारंगा गांव है। जिला मुख्यालय से इसकी दूरी 40 किमी है। लोंगकाटा जंगल इस गांव से कुछ ही दूरी पर है। इसी लोंगकाटा जंगल में पिछले दिनों पीएलएफआई उग्रवादियों की पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में पांच उग्रवादी मारे गये थे। नारंगा काफी सुदूर एवं पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां पहुंचना आसान नहीं है।



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      संत थोमस सोय के माता-पिता।
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