रांची. कांग्रेस ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला है। सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि यह सरकार कंबल ओढ़कर घी पी रही है। सीएजी की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की कई परतें खोल दी गई हैं। सीएजी की रिपोर्ट ने राज्य में रघुवर सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे की हकीकत को सार्वजनिक कर दिया। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर ने रविवार को कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उपरोक्त आरोप लगाए। उनके साथ प्रवक्ता शमशेर आलम, राजीव रंजन प्रसाद, एवं आलोक कुमार दूबे मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि समावेशी विकास का दावा करनेवाले मुख्यमंत्री के शासन में गरीबों को बांटे जाने वाले कंबल वर्ष 2016 में श्रम नियोजन विभाग ने 9.82 लाख ऊनी कंबल आपूर्ति करने का आदेश इस शर्त के साथ दिया था कि कंबल स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किया जाएगा। झारक्राफ्ट के अधिकारियों की मिलीभगत से निविदा में उल्लेखित शर्तों का उल्लंघन करते हुए बाहर से घटिया कंबल खरीदकर आपूर्ति ही नहीं किया बल्कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर भुगतान भी कर दिया गया। फर्जी दस्तावेज के आधार पर कुल 18.41 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। स्थानीय बुनकर भी रोजगार से वंचित रह गए।
राजेश ठाकुर ने कहा कि 2016 में बीपीएल परिवार को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर दो दुधारू गाय देने का सरकार ने फैसला लिया था। 5208 का लक्ष्य था। 1553 लाभुकों को गाय दी गई अर्थात लक्ष्य का 33 प्रतिशत लोगों को ही लाभ मिल पाया और सीएजी इसमें भी गड़बड़ी कर आशंका जताई है। 312 करोड़ खर्च कर खरीदे गए दुधारू पशुओं का कोई अता पता नहीं। सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया की कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के पास यह आंकड़ा ही नहीं उपलब्ध है कि रियायती दर पर कितनी गायें बांटी गई और इसपर कितनी सब्सिडी का वितरण हुआ। यह स्थिति सभी 18 जिलों की है।
उन्होंने कहा कि महालेखाकार की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि राज्य सरकार के दस पीएसयू में (अंश एवं ऋण) निवेश से राज्य सरकार को 2,092.56 करोड़ का सीधे नुकसान हुआ है। राज्य की 24 में से सिर्फ 10 पीएसयू ने लेखा जोखा जमा किया है, जिसमें से पांच कंपनियों ने करीब 22.98 करोड़ रुपए का लाभ अर्जित किया है। वहीं, पांच कंपनियों ने 1700.73 करोड़ का नुकसान उठाया है। राज्य सरकार ने 12 चल रही पीएसयू को 2009-10 से 2016-17 के दौरान 2,659.56 करोड़ की बजटीय सहायता प्रदान की है, जिनमें छह कंपनियां ऐसी है, जिनके पास तीन साल का बकाया है। महालेखाकार ने राज्य सरकार को नुकसान में चल रही पीएसयू के कामों की समीक्षा करने के बाद बंद करने की संभावना तलाशने तथा बजटीय सहायता उन पीएसयू को नहीं देने की अनुशंसा की है। साथ हीं साथ लाभ अर्जित करने वाले पीएसयू के लिए लाभांश नीति बनाने को कहा है। इसके अतिरिक्त उन कंपनियों के क्रियाकलापों की समीक्षा करने को कहा है, जिन्होंने लेखा परीक्षकों को गलत प्रमाण पत्र दिए हैं।
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