अमित सिंह,रांची.सीबीआई दिल्ली की टीम ने सीआईडी से बकोरिया कांड से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिया है। लेकिन इसमें महत्वपूर्ण गवाह और पलामू के तत्कालीन थानेदार हरीश पाठक द्वारा सीआईडी एसपी को सौंपा गया उनका निजी पत्र गायब है। इसमें हरीश पाठक ने बकोरिया कांड पर कई सवाल खड़े किए थे। पलामू के तत्कालीन एसपी पटेल मयूर कन्हैया लाल (वर्तमान में हजारीबाग एसपी) से हुई बातचीत की विस्तृत जानकारी दी थी। इसमें कई पुलिस अफसरों के भी नाम थे।
पत्र में हरीश पाठक ने कहा था कि एसपी उनपर कांड का वादी बनने के लिए दबाव डाल रहे थे। मना करने पर डांटा-फटकारा और सस्पेंड करने की धमकी दी थी। सीआईडी जांच रिपोर्ट में भी हरीश पाठक के पत्र का जिक्र नहीं है। अब सीबीआई पाठक को इस कांड का अहम कड़ी मानते हुए उनसे पूछताछ करेगी।
भास्कर ने किया था खुलासा
8 जून 2015 को मुठभेड़ में पुलिस ने 12 नक्सलियों को मारने का दावा किया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने इनकी हत्या कर फर्जी एनकाउंटर दिखाया। जांच में भी कई ऐसे तथ्य मिले हैं, जिससे मुठभेड़ पर सवाल उठ रहे हैं।
पत्र में थानेदार हरीश पाठक ने किए थे चौंकाने वाले खुलासेपत्र में पाठक ने लिखा था-घटनास्थल पर पहुंचते ही एसपी कन्हैया मयूर पटेल ने कहा, जल्दी से पंचनामा तैयार कर बॉडी पोस्टमार्टम के लिए भेज दो। वादी भी बन जाना। अपनी भी फायरिंग दिखा देना। चूंकि मुझे मामला संदिग्ध लग रहा था, इसलिए कहा कि जब मैंने मुठभेड़ किया ही नहीं तो वादी कैसे बन सकते हैं। इस पर एसपी भड़क गए। कहा-सस्पेंड कर देंगे। मुझे बुलाने के लिए घटनास्थल से सतबरवा ओपी प्रभारी मो. रुस्तम आए थे।
एसपी ने कहा था-दिक्कत नहीं होगी
हरीश पाठक ने लिखा था-एसपी के दबाव बनाने पर मैंने कहा कि जांच में जब मेरे मोबाइल का लोकेशन मौके की बजाय सदर थाने का दिखेगा तो समस्या खड़ी हो जाएगी। मैं फंस जाऊंगा। इस पर एसपी ने कहा-केस का सुपरविजन 15 दिन में हो जाएगा। तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। इसपर वे नाराज हो गए। बाद में पता चला कि सतबरबा ओपी प्रभारी मो. रुस्तम कांड का वादी बन गया है।
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