Bu Blogda Ara

1 Aralık 2018 Cumartesi

ईश्वर को याद करते हुए कर्म करना ही गुणातीत धर्म : स्वामी माधवानंद

{content: श्रीमद् भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सांसारिक जीवन में सात्विक, राजसिक और तामसिक जैसे तीन गुणों का उल्लेख किया है। इस कालातीत ग्रंथ के 14वें अध्याय में यह वर्णन है, जिसमें मन की संरचना और अंतर्मन के कारण मनुष्य के व्यवहार में होने वाले परिवर्तन के कारणों का जिक्र है। ये बातें चिन्मय मिशन के आचार्य स्वामी माधवानंद ने कहीं। वह श्रीमद् भगवत गीता पर सेल सिटी में 29 नवंबर से 1 दिसंबर तक चलने वाले प्रवचन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस अध्याय में बताया है कि सात्विक गुण होने से मनुष्य शांतचित्त, विवेकवान, विचारशील और प्रकाशमान होता है। राजसिक गुण के व्यक्तियों में क्रोध और लोभ का आधिक्य होता है। जबकि, तामसिक गुण के लोगों में निद्रा, प्रमाद, मोह और अज्ञान की अधिकता होती है। सात्विक गुण के व्यक्ति सत्संगी होते हैं और वे विचारशील होते हैं। जबकि, राजसिक गुण के व्यक्ति कर्म को प्रधानता देते हैं और तामसिक गुण के लोगों में जड़ता होती है और उनमें मोह का अधिक्य होता है। भगवान कृष्ण ने महाभारत के मैदान में अर्जुन को इन तीनों गुणों से ऊपर उठकर सोचने और कार्य करने को प्रवृत्त किया और बताया कि इसी प्रक्रिया को गुणातीत धर्म कहते हैं। अर्जुन ने उनसे पूछा कि गुणातीत धर्म क्या है तो भगवान ने उनको बताया कि जैसा कि सांख्य योग के वर्णन में है, स्थितप्रज्ञ होकर कर्म करना ही गुणातीत धर्म है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
, title:Dainik Bhaskar, url: https://ift.tt/2AHVaQj , author: ns.support@dainikbhaskar.com (Bhaskar News Network) , feed_url: https://ift.tt/1PKwoAf, }

0 yorum:

Yorum Gönder

Popüler Yayınlar

Labels

Blog Archive