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1 Aralık 2018 Cumartesi

तालीम से ही दीन व दुनिया में कामयाबी

{content: अंजुमन प्लाजा एमजी रोड सभागार में शनिवार को जलसा सीरत उन नबी व ऑल इंडिया नातिया मुशायरा हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. शमीम हैदर ने की। जलसे की शुरुआत कारी सुहैब और क़ारी यहया फ़ाज़ली हुसैनी के तिलावत-ए-कुरआन पाक से हुई। मुख्य अतिथि ईरान यूनिवर्सिटी के प्रो. वाइस चांसलर हजरत मौलाना महेदी महर, खतीब ए अहले सुन्नत हजरत मौलाना सैयद इब्राहिम फ़ाज़ली हुसैनी और नगर विकास मंत्री सीपी सिंह थे। विशिष्ट अतिथि हज कमेटी के चेयरमैन डॉ. रिज़वान खान, अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन कमाल खान, अलीम अहले सुन्नत मौलाना यहया फ़ाज़ली, अंजुमन के चेयरमैन हाजी इबरार अहमद थे।

प्रो. वाइस चांसलर हजरत मौलाना आकाई महेदी महर ने कहा कि अगर आज दुनिया के मुसलमान मसलक को छोड़कर कलमा ए तैयब की बुनियाद पर एक हो जाएं, तो किबला अव्वल एक लम्हे में आजाद कराया जा सकता है। सेहुनी ताकतों ने मुसलमानों को हमेशा आपस में लड़ाने का काम किया है। इस्लामी मुल्क ईरान का एक ही नारा है एक होकर शिया, सुन्नी के बीच की दूरी को मिटाकर फलस्तीन के मजलूम मुसलमानों की मदद करें। यही इंसानियत का पैगाम है। अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद को रहमत बनाकर भेजा। वो पूरी इंसानियत के लिए रहमत हैं।

खतीब अहलेसुन्नत हजरत मौलाना सैयद इब्राहिम फ़ाज़ली हुसैनी इमाम व खतीब मस्जिद आह्नाफ ईरान ने कहा कि नफ़्स की इस्लाह जरूरी है। शिक्षा सभी के लिए जरूरी है। चाहे वह दुनिया हासिल करना चाहता है या आखरत या किसी भी फील्ड में आगे आना चाहता है तो उसे शिक्षा की जरूरत होगी। बगैर शिक्षा के आप बेहतर नहीं कर सकते। ईरान के रईस मसाइल वहीद रोशनी ने कहा कि में हिंदुस्तान के सफर में जब से हूं मुझे फ़र्क़ महसूस नहीं हुआ कि में ईरान में नही हूं। यहां के लोग बड़े मिलनसार हैं। प्रोफेसर हुसैन अहमद ने कहा कि आलिमो की इज्जत व एहतराम जरूरी है। इस जमीन पर न कोई शिया है न सुन्नी, ना मुसलमान हैं, बल्कि सबके सब हजरत मोहम्मद के उम्मत हैं। अहले बैत को चाहने वाले हैं। ये सभी हज़रात फ़ारसी में बयान कर रहे थे और ट्रांसलेशन हजरत मौलाना सादिकुल हुसैनी कर रहे थे।

ईरान के रईस मसाइल वहीद रोशनी ने कहा- हिंदुस्तान के सफर में मुझे फर्क महसूस नहीं हुआ

जलसा में प्रो. वाइस चांसलर हजरत मौलाना आकाई महेदी महर व अन्य।

लोग मुशायरा का लुत्फ उठाते रहे

शायर डॉ. माइल चंदौली ने जब पढ़ा कि बजाहिर जो हम ताजिया चुमते हैं, मजार शाहै कर्बला चुमते हैं, मुल्क इनके हाथों का लेते हैं बोसा, जो संग दरे मुस्तफ़ा चूमते हैं।

शायर चंदन सा नेहाल ने पढ़ा कि

या नबी आपके हाथों पर जो आए पत्थर, खुद-ब-खुद कलमा तौहीद सुनाएं पत्थर आपके जैसा जमाने में ना देखा ना सुना, फूल लौटा दे जिस सिम्त से आए पत्थर।

शायर अंबर तुराबी ने पढ़ा रखता है जो नबी की मोहब्बत संभाल कर, उसकी खुदा भी रखता है इज्जत संभाल कर, जिस तरह अपने बच्चों को रखता है एक बाप, ऐसे रसूल रखते हैं आयत संभाल कर।

इनके अलावा शायर ऋषि पांडेय, फारुख सरियावी, जावेद गोपालपुरी, हसन काटोखरी, निजाम कैसर, सोहेल सईद, परवेज रहमानी ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए।

ईरान से आए हुए मेहमानों ने जोहर की नमाज मदीना मस्जिद में अदा की

पूरा मजमा हजरत का बयान बागौर सुन रहा था। अंजुमन हॉल हजरत के बयान सुनने के लिए खचाखच भरा हुआ था। लोग इस बयान को सुनने के लिए रांची नहीं बल्कि बिहार, बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, दिल्ली और झारखंड के कई जिलाें से आए हुए थे। हजरत के बयान के बाद मुशायरा शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। लोग मुशायरा से लुत्फ अंदोज होते रहे। मुशायरा में आने वाले सभी मेहमानों का स्वागत मुशायरा के कन्वीनर हजरत मौलाना सैयद तहजीब उल हसन रिजवी ने किया। जलसा को मरकज़ी मजलिस उलेमा के नाज़िम आला डॉ. उबेदुल्ला क़ासमी, मुफ़्ती सलमान क़ासमी, मौलाना ज़ियाउलहोदा और मुफ़्ती अब्दुल्ला अज़हर क़ासमी ने भी संबोधित किया। संचालन मौलाना शरीफ अहसन मजहरी और नेहाल हुसैन सरयावी ने किया। इस अवसर पर सैयद शहज़ाद हुसैन, नौशद अली, आसिफ रज़ा, शमीम रिज़वी, प्रो. सैयद हसीन अहमद, एसएम आसिफ, मेहदी इमाम, जफरुल हसन, इक़बाल फातमी, अशरफ हुसैन, आमिर हुसैन रिज़वी, क़ासिम अली, असगर इमाम, नदीम, ताबिश रज़ा, अरशद हुसैन, शमशेर अली, ज़ीशान हैदर, तनवीर अहमद, मौलाना तस्लीम रज़ा, मौलाना काजिम हुसैन, मौलाना नसिरुल मेहदी समेत सैंकड़ों लोग थे। हिंदपीढ़ी स्थित इदरिसिया तंजीम हाई स्कूल ने ईरान से आए मेहमानों का विद्यालय में स्वागत किया गया। ईरान से आए हुए मेहमानों ने जोहर की नमाज मदीना मस्जिद मैं अदा की।



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