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1 Aralık 2018 Cumartesi

राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों से आए लोगों ने प्रकृति कला, खाद्य पदार्थ, औषधीय पौधों से रूबरू करवाया

{content: हम जंगल के जीव-जंतु और प्रकृति को पूजते हैं, उनके चित्रों से घरों को सजाते हैं, जिसे सोहराई पेंटिंग कहते हैं। ये बातें हजारीबाग के जोराकाठ से आईं मालो देवी ने कही, जो लाइव सोहराई पेंटिंग कर रही थीं। मौका था डोरंडा वन भवन के पलाश सभागार में शनिवार को शुरू हुए तीन दिवसीय 'वन मेला-2018' का। इसका आयोजन झारखंड वन विभाग व फॉरेस्ट ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (फोवा) ने किया। उद्घाटन वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी और मीता चतुर्वेदी ने ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच बलून उड़ा कर किया। अपर मुख्य सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी ने कहा कि यह पहला वन मेला है, जिसमें हमारे वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि वनवासी सशक्तीकरण के लिए विभाग और फोवा ने वन मेला की शुरुआत की है। इस अवसर पर पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ प्रियेश वर्मा, आरसीसीएफ एटी मिश्रा, एमके सिंह, राजीव लोचन बख्शी, तारकनाथ, फोवा की अध्यक्ष बबीता मिश्रा, सचिव लीना रस्तोगी, निशि कुमार आदि मौजूद रहे।

40 स्टॉल्स में रोजमर्रा की चीजें मिल रही हैं

वन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी, मीता चतुर्वेदी, फोवा की अध्यक्ष बबीता मिश्रा मौजूद रहीं।

इस मेले में राज्यभर से आए हुए विभिन्न वन प्रमंडल के वनवासियों द्वारा 40 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं। प्राकृतिक चीजों से बनी सामग्री, खाद्य सामग्री, रोजमर्रा के जरूरी और सजावटी सामान, पेंटिंग्स, मिट्टी, पत्थर व धातुओं के आभूषण एवं कलाकृतियां, टेराकोटा, ड्रेसेज, औषधीय पौधे आदि उपलब्ध हैं। यह मेला 3 दिसंबर तक चलेगा।

बांस से लेकर मिट्टी के आइटम्स : वन मेला में देवघर वन प्रमंडल से आए दशरथ ठाकुर, ट्रेसा मरांडी अौर आशुतोष बांस से बने सामानों का स्टॉल लगाए हैं। इसमें हाथ से बने बांस के फ्लावर पॉट, पेन स्टैंड, डॉल, लैंप के अलावा घर को सजाने के लिए कई डेकोरेटिव आइटम्स रखे हैं। इनकी कीमत 70 रुपए से 250 रुपए तक है। वहीं जामताड़ा वन प्रमंडल से आए शशि कुमार प्रजापति मिट्‌टी और टेराकोटा से बने सामान रखे हैं। इनमें कप, प्लेट, के अलावा घर में इस्तेमाल होने वाले कई सामान उपलब्ध हैं।

सोहराई पेंटिंग करतीं मालो देवी।



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Ranchi News - people coming from different forests of the state have done naturally with nature food medicinal plants
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