रांची. स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की कार्यशैली का बड़ा ही दिलचस्प मामला सामने आया है। राज्य में एक्सीलेंस बर्न यूनिट की स्थापना के लिए 9 नवंबर को नई दिल्ली में एमओयू साइन होना था। स्वास्थ्य विभाग ने जिस अधिकारी को बैठक में भाग लेने की जिम्मेदारी सौंपी, वह बैठक में गया ही नहीं। क्योंकि बैठक के भाग लेने की सूचना उस अधिकारी को वॉट्सएप पर दी गई। अधिकारी ने वॉट्सएप खोला नहीं। जब मैसेज देखा तब तक काफी देर हो चुकी थी।
अब केंद्र ने राज्य सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं मानते हुए योजना ही रद्द कर दी। इसके बाद अधिकारी एक-दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं। इस मामले में विभागीय सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी ने बैठक में भाग लेने नहीं लेने वाले अधिकारी को शोकॉज किया है। पूछा है कि आपके कारण योजना रद्द हो गई। क्यों न आप के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। 24 घंटे में स्पष्टीकरण दें नहीं तो विभाग की तरफ से एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. यूके सिंह ने कहा कि वॉट्सएप नंबर पर्सनल है। मैं उसे देखता भी नहीं हूं। फैमिली के लोगों से मिले मैसेज ही कभी-कभार देखता हूं। वॉट्सएप पर आदेश भेजना जायज नहीं है। फोन पर सूचना देनी थी। वह भी नहीं दी गई। 8 नवंबर की शाम 6:27 बजे दिल्ली जाने का लेटर दिया गया। चाह कर भी नहीं जा सके। जहां तक योजना निरस्त होने की बात है, तो वह दो-तीन महीने पहले ही पीएमओ की ओर से निरस्त कर दी गई है।
राज्य के रिम्स रांची और एमजीएम जमशेदपुर में नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ बर्न इंजरी (एनपीपीएमबीआई) के तहत इलाज के लिए एक्सीलेंस सेंटर बनना था। साथ ही डॉक्टर और पैरामेडिकल की ट्रेनिंग सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं भी केंद्र सरकार देती। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार में एमओयू होना था। इसके लिए 9 नवंबर की तिथि निर्धारित थी। बैठक में निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं सह नोडल पदाधिकारी बर्न एवं ट्रॉमा केयर डॉ. यूके सिन्हा को भाग लेना था। इससे संबंधित पत्र 6 नवंबर को विभागीय संयुक्त सचिव (बजट शाखा) की ओर से डॉ. सिन्हा के वॉट्सएप नंबर पर भेजा गया। उन्होंने उसे देखा नहीं। पत्र और एमओयू की हार्ड कॉपी 8 नवंबर की शाम डॉ. सिन्हा को दी गई। जबकि अगले दिन सुबह 9 बजे दिल्ली में मीटिंग थी। अंतत: डॉ. सिन्हा मीटिंग में नहीं जा सके।
झारखंड में अभी रिम्स और एमजीएम में ही बर्न यूनिट काम कर रही हैं। वह भी प्राइमरी केयर के रूप में। सुपर स्पेशिएलिटी नहीं होने से आज भी मरीजों को सफदरजंग नई दिल्ली या फिर और ऐसे ही अन्य सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में जाना पड़ता है। राज्य में जिला अस्पतालों और अन्य स्थानों पर 26 बर्न यूनिट बनाए गए हैं जो काम नहीं कर रहे। प्रति यूनिट पर 1.40 करोड़ खर्च किए गए।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today , title:Dainik Bhaskar, url: https://ift.tt/2Sl3yfH , author: ns.support@dainikbhaskar.com (Dainik Bhaskar) , feed_url: https://ift.tt/1PKwoAf, }
0 yorum:
Yorum Gönder