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देश में ग्रीन हाउस के जनक के रूप में विख्यात सीआईएसी के पूर्व निदेशक डॉ. प्रीतम चंद्रा ने कहा कि जब तक देश में सस्ते मजदूर मिलते रहेंगे, तब तक किसानों की आय दोगुनी नहीं हो सकती है। जब देश में मनरेगा लांच हुआ, तब देश में अचानक मजदूरों की कमी हो गई। इसके बाद कई राज्यों में कृषि उपकरणों की मांग बढ़ गई है। अगर झारखंड को कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ना है और किसानों की आय दोगुनी करनी है, तो हल-बैल पद्धति से उठना होगा। देश के कई राज्य तथा कई देश आज मशीनरीज का उपयोग कर न केवल अपनी इनकम बढ़ा रहे हैं, बल्कि कम समय में, कम पानी तथा कम खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर हम मशीनरीज का उपयोग करेंगे, तो 15-20% कम बीज, 20-25% कम पानी, 20-30% कम मजदूर का उपयोग होगा। इतना ही नहीं आय दोगुनी करने के लिए खेती के बाद जो वेस्टेज निकलते हैं, उसकी भी रिसाइकलिंग करके कंपोज तैयार किया जा सकता है। चंद्रा ने उक्त बातें खेलगांव में ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट के दौरान आयोजित कृषि उपकरण विषय पर आयोजित सेमिनार के दौरान कहीं।
विशेषज्ञों ने बताया... कृषि उपकरणों का उपयोग कर किसान खाद, बीज और मजदूरी का खर्च कर सकते हैं कम
अभी किसानों की आय 6426 रु.
आईसीएआर दिल्ली के एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग साइंटिस्ट डॉ. राॅफ अहमद पारे ने कहा कि वर्तमान में किसान की औसत आय 6426 रुपए प्रति माह है। इसको दुगना करने का अर्थ है कि 2022 तक किसानों की आय को 12,852 रुपए प्रतिमाह करना होगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में विकास दर 24% होनी चाहिए, जो कि वर्तमान विकास दर 4.9% की तीन गुनी है। किसानों की आय को दोगुना करने के साथ उसकी आय स्टेबलाइज करना जरूरी है।
30 दिन में मिली जमीन, 100 करोड़ के प्लांट से उत्पादन शुरू
रांची | मदर डेयरी के प्रदीप्ता कुमार साहू ने कहा कि यहां की सरकार काफी अच्छी है। यहां काफी सुविधाएं हैं। साल 2016 में कंपनी ने झारखंड में उद्योग लगाने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव दिया था। कंपनी को 30 दिनों के भीतर ही इटकी क्षेत्र में 27 एकड़ जमीन मिल गई। कंपनी ने एक साल के भीतर 100 करोड़ का प्लांट स्थापित कर दिया। उत्पादन भी शुरू हो गया है। राज्य के किसानों को प्रशिक्षित कर अमेरिकन स्वीट कॉर्न, मटर और टमाटर की खेती शुरू की गई है। कंपनी का किसानों से संपर्क है। उनके माध्यम से खेती कराई जा रही है।
हम दोगुनी की बात करते हैं, झारखंड के किसान तो आय को कर सकते हैं 4 गुना : नीति आयोग
पॉलिटिकल रिपोर्टर | रांची
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि 4 वर्ष के शासनकाल में झारखंड में क्रांति आई है। कृषि विकास दर में माइनस चार फीसदी से प्लस 14.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। मत्स्य के क्षेत्र में भी झारखंड ने लंबी छलांग लगाई है। मत्स्य उत्पादन 4 साल में 83 फीसदी बढ़ा है। पूरे देश में ऐसा उदाहरण नहीं है। 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर कार्य हो रहा है। राज्य के किसान कृषि के साथ डेयरी और मत्स्य पालन की ओर ध्यान दें तो यहां के किसान 2022 तक अपने आय को दोगुना नहीं बल्कि 4 गुना तक कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में लगातार बदलाव हो रहा है। किसान अपने दृढ़ निश्चय और संकल्पशक्ति की बदौलत अपनी प्रगति के वाहक स्वयं बनेंगे। केंद्र सरकार ने भी कृषि के क्षेत्र में काफी काम किया है।
मिनरल नहीं अब कृषि के क्षेत्र में भी झारखंड का नाम : मुख्य सचिव
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि झारखंड की जलवायु, यहां की भौगोलिक स्थिति, यहां के मेहनतकश किसान और मजदूर उन्नत कृषि कार्य के लिए अनुकूल हैं। राज्य में कृषि और फूड प्रोसेसिंग में अपार संभावनाएं हैं। खनिज संपदा के साथ-साथ अब कृषि के क्षेत्र में भी झारखंड देश-दुनिया मंे जाना जाता है। यह कार्यक्रम उस मंच की तरह है जहां कृषि से संबंधित सभी लोग उपस्थित हुए हंै। सभी अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, तो उसका परिणाम कृषि क्षेत्र में परिलक्षित होगा।
जरूरत का आधा दूध भी उत्पादित नहीं हो रहा : सोढ़ी
अमूल इंडिया के एमडी आरएस सोढ़ी ने कहा कि भारत विश्व भर में दूध उत्पादन में पहले नंबर पर है। झारखंड में 52 लाख लीटर दूध उत्पादन हर दिन होता है। जबकि यहां जरूरत 130 लाख लीटर की है। 75 लाख लीटर की कमी है। अन्य राज्यों से झारखंड 13 से 14 हजार करोड़ का दूध खरीदता है। अगर झारखंड में 25 लाख लीटर दूध उत्पादन होता है, तो 2 लाख 75 हजार परिवार लाभान्वित होंगे, 8 से 10 हजार करोड़ का मुनाफा राज्य सरकार को होगा।
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