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राजधानी के मोरहाबादी मैदान को टाइम्स स्क्वायर के रूप में विकसित करने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इस योजना का डीपीआर बनाने से लेकर उसे धरातल पर उतारने में अफसरों ने मनमानी की है। नगर विकास के अफसरों ने योजनाबद्ध तरीके से इस प्रोजेक्ट का डीपीआर 25 करोड़ रुपए से कम का बनाया, ताकि इसे स्वीकृति के लिए कैबिनेट न भेजना पड़े।
नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको ने कुल 24.63 करोड़ रुपए का डीपीआर तैयार किया। इसमें 1 प्रतिशत लेबर सेस जोड़कर टेंडर निकालना था। एक प्रतिशत सेस जोड़ने पर प्रोजेक्ट की लागत 25 करोड़ रुपए से अधिक हो जाती, इसलिए लेबर सेस को घटाकर 0.2 फीसदी कर दिया गया। एलईडी स्क्रीन को भी बेतरतीब तरीके से लगाकर मैदान को खराब कर दिया गया। यह देख मुख्यमंत्री ने 9 एलईडी स्क्रीन मैदान के अंतिम किनारे पर शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। इससे करीब तीन करोड़ रुपए और खर्च होंगे। अब गड़बड़ी करने वाले को सरकार खोजने में जुट गई है, ताकि इसमें खर्च हुई राशि की वसूली संबंधित पदाधिकारियों से की जा सके।
मुख्य सचिव ने दोषियों की जानकारी मांगी तो अफसरों ने बताया-पूर्व सीएस और पीएस के निर्देश पर हुआ काम, अब शिफ्ट करने पर 3 करोड़ होंगे खर्च
सीएम का निर्देश, 20 मीटर तक पीछे करें एलईडी स्क्रीन
मोरहाबादी मैदान के अधिकतर हिस्से को कवर करते हुए एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इसके लिए पक्की संरचना बनाई गई और पोल खड़ा किया गया। हालांकि ऐन वक्त पर मुख्यमंत्री की नजर इस गड़बड़ी पर पड़ी। उन्होंने मोरहाबादी मैदान में लगाए गए 9 स्क्रीन को 10 से 20 मीटर तक पीछे करने का निर्देश दे दिया। मुख्यमंत्री के इस पहल से मैदान तो बच गया, लेकिन एलईडी स्क्रीन को शिफ्ट करने में और खर्च होने वाले करीब 3 करोड़ रुपए की भरपाई कहां से होगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
मुख्य सचिव के सामने पदाधिकारियों ने पूर्व मुख्य व प्रधान सचिव को बताया दोषी
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पिछले माह बैठक हुई थी। मुख्य सचिव ने जुडको के पदाधिकारियों से पूछा था कि किसके निर्देश पर मैदान के बीच में एलईडी स्क्रीन लगाया गया। दबी जुबान से एक पदाधिकारी ने कहा कि तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने मोरहाबादी मैदान के सौंदर्यीकरण का प्रेजेंटेशन देखकर काम कराने का निर्देश दिया था। वहीं, नगर विकास विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह स्वयं प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर रहे थे। उनके निर्देशन में ही काम कराया गया। इसके बाद मुख्य सचिव शांत हो गए, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि काम कराने वाले पर कार्रवाई की जाए। अब नगर विकास के अधिकारी गड़बड़ी करने वाले की तलाश कर रहे हैं। हालांकि गड़बड़ी और पैसे की बंदरबांट में कई बड़े अधिकारी की संलिप्तता की वजह से जुडको के छोटे अधिकारी पर कार्रवाई कर मामले की लीपापोती करने करने की भी तैयारी हो रही है।
डिजाइन के अनुसार ही लगाई गई है एलईडी स्क्रीन
मोरहाबादी मैदान के सौंदर्यीकरण का जो डिजाइन तैयार किया गया था उसी के अनुसार वहां एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। डीपीआर अप्रूव भी हुआ है। अब एलईडी स्क्रीन का पोल शिफ्ट होना सेकेंडरी मैटर है। वैसे मैं इस मामले में विशेष कुछ नहीं कह सकता। विभाग ही जानकारी दे सकता है। -अल्बर्ट, प्रोजेक्ट इंचार्ज, मैनहर्ट
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