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एनीमिया, वह स्थिति है, जिसमें रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। इसे 'आयरन की कमी' या 'खून की कमी' भी कहा जाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचाता है। गर्भावस्था में शरीर को प्रर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन की जरूरत रहती है। शिशु के विकास के लिए ऑक्सीजन एवं अन्य मेटाबॉलिक की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए। यदि रक्त में पर्याप्त हीमोग्लोबिन की कमी हो तो शरीर के अंगों और ऊतकों को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगा।
डॉ. गोपा चौधरी, गायनोकोलॉजिस्ट, रांची
एनीमिया के लक्षण हैं
हीमोग्लोबिन का लेबल 11% से कम होना
थकान, चिड़चिड़ापन और ऊर्जा में कमी
सांस लेने में कठिनाई, कमजोरी और चक्कर आना
पलकों और नाखूनों का फीका पड़ना
जीभ में पीड़ा और मुंह में अजीब स्वाद आना
बालों का झड़ना और ठंड सहन न कर पाना।
इन कारणों से होती है खून की कमी
फॉलिक एसिड की कमी (फॉलिक एसिड की कमी वाला एनीमिया)
विटामिन बी-12 की कमी (मेगालोब्लास्टिक एनीमिया)
फॉलिक एसिड और विटामिन बी-12 की संयुक्त कमी (मैक्रोसाइटिक एनीमिया)
प्रेगनेंसी में एनीमिया खतरनाक
भारत में 10 में से 6 महिलाएं एनीमिया से पीड़ित
60 से 70 प्रतिशत किशोरियों में एनीमिया के लक्षण
एनीमिया होने पर थकान, कमजोरी, चक्कर आने के लक्षण दिखते हैं
हीमोग्लोबिन स्तर : हीमोग्लोबिन स्तर 11 ग्राम/डेसीलीटर रक्त से कम होने पर एनीमिया माना जाता है।
10 से 10.9 ग्राम/डेसीलीटर रक्त तक हल्का एनीमिया
7 ग्राम/डेसीलीटर रक्त से कम होने पर गंभीर एनीमिया
7 से 9.9 ग्राम/डेसीलीटर रक्त तक मध्यम स्तर का एनीमिया
आयरन की कमी वाला एनीमिया सबसे ज्यादा
हालांकि, गर्भावस्था में आयरन की कमी वाला एनीमिया सबसे आम है। भारतीय महिलाओं में आयरन की कमी वाला एनीमिया दुनियाभर में सबसे ज्यादा है। बहुत सी महिलाओं में गर्भवती होने से पहले से ही आयरन की कमी होती है। शोध बताते हैं कि भारत में 10 में से छह गर्भवती महिलाओं में एनीमिया है। कुछ सर्वेक्षणों के मुताबिक यह आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है।
हमारे देश में महिलाओं को अपने आहार से पर्याप्त आयरन नहीं मिल पाता। शरीर आयरन के शाकाहारी स्रोतों की तुलना में गैर शाकाहारी/ मांसाहारी स्रोतों को अधिक कुशलता से अवशोषित करता है। इसलिए शाकाहारियों को आयरन की जरूरत पूरा करने के लिए आहार में इसकी मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता होती है। अगर आपके आहार में आयरन की कमी है, तो आपको एनीमिया होने का खतरा रहता है। रेड मीट, चिकन, होल ग्रेन्स, बींस, लेंटिल्स, आलू, काजू, पत्तेदार सब्जियां, पालक, फूला हुआ चना, गुड़, केला, होल ग्रेन्स, खजूर आदि। इसके साथ ही लोहे के बर्तन में खाना पकाने से भी आयरन मिलता है।
समय पर उपचार न करने पर जोखिम बढ़ेगा :
समय से पहले प्रसव का दर्द उठना
जन्म के समय शिशु का कम वजन या फिर अपने अपने विकास के चरण से छोटा शिशु
शिशु में जन्म के समय आयरन का कम स्तर
गर्भावस्था में संक्रमण हो जाना।
हमेशा लोहे के बर्तन में खाना पकाएं
गर्भावस्था में अधिक मात्रा में चाहिए आयरन
जब आप गर्भवती होती हैं, तो आपके शरीर को सामान्य से अधिक आयरन की जरूरत होती है। यह इसलिए ताकि बढ़ते शिशु के लिए जरूरी रक्त का उत्पादन भी किया जा सके। आपके शरीर में द्रव्य की मात्रा भी बढ़ जाती है, इसलिए हीमोग्लोबिन मिश्रित होकर पतला हो जाता है। गर्भाधान से पहले आपके लिए आयरन की रिकमेंडेड डायटरी एलाउंस (आरडीए) या आयरन की जरूरत 30 मि.ग्रा. होती है। गर्भावस्था में यह बढ़कर 38 मि.ग्रा. हो जाती है।
डॉक्टरी सलाह :
पहले विजिट पर हीमोग्लोबिन की जांच, 30वें और 36 वें सप्ताह में।
बैलेंस डायट- आयरन, प्रोटीन, विटामिंस से भरपूर भोजन करें।
भूख बढ़ाने के लिए टॉनिक।
इन्फेक्शन कंट्रोल, अगर है तो।
एनीमिया के कारण की जांच एवं इलाज, जैसे हुकवर्म, मलेरिया।
दवाइयां : -आयरन थेरेपी- ओरल आयरन टैबलेट या कैप्सूल।
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