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आजकल हर 20 में 10 बच्चे को भूख कम लगने की शिकायत है। बच्चे का ग्रोथ ठीक से नहीं होता। अधिकतम मामलों में इसकी वजह यकृत (लिवर) में समस्या होती है। बच्चे बाजार की सामग्री पसंद करते हैं। फास्ट फूड का कल्चर बढ़ा है। यहां तक कि सब्जियों और फलों में भी कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से ये भी प्रदूषित हो गए हैं। ऐसे खान-पान की वजह से लीवर में सूजन हो जाता है। यह आज बेहद आम समस्या हो गई है। लीवर बढ़ गया है या नहीं, इसे जानने के लिए बच्चे के लीवर की जांच कराई जाती है।
लीवर में समस्या बढ़ने पर पीलिया हो जाता है। लीवर संबंधी बीमारियों को दूर करने के मामले में आयुर्वेद समृद्ध माना जाता है। इस रोग में भू-आंवला बहुत कारगर है। इसका पौधा छोटा होता है और यह आसानी से मिल जाता है। इसका रस निकालकर मिसरी के साथ बच्चे को देने पर तुरत लाभ मिलता है। यकृत विकार में फल त्रिकादी क्वाथ उम्र के हिसाब से दिया जाता है। और भी औषधियां है, जिन्हें बच्चे की उम्र के हिसाब से दिया जाता है। ये ड्रॉप, सिरप और टैबलेट के स्वरूप में उपलब्ध हैं।
डॉ. कमलेश प्रसाद, आयुर्वेद विशेषज्ञ, रांची
यकृत विकार के लक्षण : भूख नहीं लगना
खाना नहीं पचना, शरीर में कमजोरी
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