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6 Nisan 2019 Cumartesi

मिथिलाधाम बना हरमू, मैथिली गीतों की फुहार से भीगा तन-मन

{content: हरमू मैदान में मिथिला महोत्सव के दौरान स्थानीय और मेहमान कलाकारों ने जमाया रंग, साहित्यकार और प्रतिभाशाली युवकों को भी किया गया सम्मानित।

सिटी रिपाेर्टर| रांची

हरमू मैदान में तीन दिवसीय मिथिला महाेत्सव के दूसरे दिन स्थानीय अौर मेहमान कलाकारों ने मिथिलावासियों का भरपूर मनोरंजन किया। खराब मौसम के बावजूद भीड़ जुटी। महोत्सव की शुरुआत मिथिला की परंपरागत गीत जय-जय भैरवी असुर भयावनी, पशुपति भा मिनि माया से हुर्इ। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुअात मुख्य अतिथि नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, मिथिला मंच के अध्यक्ष श्रीपाल अौर विवेकानंद झा मुन्नू ने दीप प्रज्जवलित कर की। अतिथियों का मंच के स्वयंसेवकों ने पाग पहना कर, दुपट्टा अड़ाकर अौर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मंच के अध्यक्ष श्रीपाल झा, महासचिव संताेष झा, मंच संयाेजक मनाेज मिश्रा ने कहा कि झारखंड मिथिला मंच किसी जाति विशेष का नहीं है। इससे सभी मिथिलावासियों का जुड़ाव है। जब तक हम अपनी मातृभाषा के प्रति इच्छाशक्ति नहीं रखेंगे, तब तक मां मैथिली के प्रति सच्ची पूजा नहीं हाेगी। मैथिली भाषा की पढ़ार्इ जल्द झारखंड मंे हर स्कूल के साथ विवि में हाे। इसका प्रयास झारखंड मिथिला मंच कर रहा है। मंत्री सीपी सिंह ने भी मिथिला संस्कृति को धनी बताते हुए कहा कि मिथिला के घरां में त्यौहारां में गीत गाए जाते हैं। उसमें कही ना कही वेद धवनि की सुगंध अाती है। मिथिला का माछ, भात अकार माखन अति प्रिय भानेज है। इसके बगैर किसी भी शुभ कार्य की पूर्णता नहीं अाती।

हम सब मिथिलावासी, सजल धजल रांची लगे अनमन मिथिलाधाम....

इसके बाद रंगारंग कार्यक्रम शुरू हुए। कलाकार पंडित हरिनाथ झा ने रांची के रई की भ गेलै, रांची त बिहार भ गेलै.. गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर किया। रंजना झा ने छिटकल इजाेरिया.. गाकर सबकाे मंत्रमुगध किया। जब माधव राय अाैर जूली झा ने भी गीत प्रस्तुत कर तालियां बटाेरीं। माधव ने हम मैथिल सब मिथिला वासी हमर र्इ गुमान याै, सजल धजल रांची लगे अनमन मिथिलाधाम.., जूली ने मिथिला वर्णन व जट जटिन.. गीत गाकर झूमाया। वही पूनम मिश्रा ने सुनु रसिया एवं स्वर्ग स सुंदर मिथिलाधाम.. जैसे गीत प्रस्तुत किए। निभा झा अाैर रूपा ने पुराने जमाने के मधुर गीत गाए। रामसेवक ठाकुर ने अपने लतीफे से लाेगाें काे लाेटपाेट कर दिया। मिथिला के पारंपरिक नृत्य झिझिया डाेमकच की प्रस्तुत की गई।



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