रांची. शुक्रवार सुबह आराहंगा पंचायत के इचापीड़ी निवासी 52 वर्षीय छुटु सिंह पातर को एक जंगली हाथी ने कुचल कर मार डाला। झाड़ियों में छिपे हाथी ने छुटु पातर को नजदीक पाकर हमला कर दिया। हमले से बचने के लिए छुटु ने सामने बने 12 फीट गहरे गड्ढे में कूदकर जान बचाने की कोशिश की। लेकिन हाथी वहां भी पहुंच गया और उसे कुचल कर बेरहमी से मार डाला। ग्रामीणों ने बताया कि इस दौरान दो युवक मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक हाथी भाग चूका था। घटना के बाद विभाग के प्रति ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया।
घटना सुबह पांच बजे की बताई जा रही है। मृतक के घर में उसकी बीमार पत्नी गिरिबाला देवी और दो बेटे सुनील और आजाद पातर हैं। उधर, घटना की जानकारी के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन क्षेत्र पदाधिकारी अमरनाथ भगत के निर्देश पर वनपाल और तमाड़ पुलिस ने मृतक की पत्नी को मुआवजे की अग्रिम 50 हजार रुपए की राशि सौंपी।
तमाड़ में दो महीने में इस वर्ष की घटी इस तरह की दूसरी घटना से ग्रामीणों में दहशत के साथ आक्रोश देखा जा रहा है। इससे पूर्व नावाडीह गांव में धीरालाल महतो की 28 वर्षीय पत्नी प्रमिला देवी की भी दो जनवरी को एक विशालकाय हाथी ने पटक कर मार डाला था। आक्रोशित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग की एक न चलने दी और डीएफओ को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए शव को 11 घंटे तक प्रशासन को उठाने नहीं दिया था। खूंटी डीएफओ के आने और सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन मिलने के बाद ही पुलिस ने शव को कब्जे में किया था। यह भी मांग की गई थी कि जंगली हाथी को मार गिराया जाए। डीएफओ ने हाथी की तीन महीने में पहचान करने तथा पागल घोषित करने की बात कही थी।
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