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हेल्थ रिपोर्टर
रांची
शरीर के निचले हिस्से में आने वाले सुन्नपन और कमजोरी को नजरअंदाज नहीं करंे। कई बार यह सामान्य बीमारी नहीं होती है। रीढ़ की हड्डी व गर्दन में ट्यूमर होने के कारण भी ऐसा हो सकता है। इसके डायग्नोस और इलाज में देरी करने पर लकवा आने का खतरा बढ़ जाता है। रीढ़ की हड्डी और इसकी नस में होने वाला ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चों में यह बीमारी हो जाती है। कभी-कभी यह ट्यूमर हड्डी की नस में हो जाता है। यदि शरीर के दूसरे हिस्से जैसे ब्रेस्ट, दिमाग, लंग्स में ट्यूमर है तो यह रीढ़ की हड्डी तक फैल जाता है। थायरॉइड की गांठ भी यहां तक पहुंच सकती है। ये भी दर्द का कारण बन जाती है। कई बार नस दबने से भी यह हिस्सा कमजोर पड़ने से पेशेंट सुन्नपन की शिकायत करता है। इसे अवॉइड करने पर लकवा आने की संभावना बढ़ जाती है। रीढ़ की हड्डी के ऊपरी और निचले हिस्से में गांठ होने पर लंबे समय तक लकवा, सुन्नपन और कमजोरी की शिकायत रहती है। लकवे से बचने के लिए ये लक्षण आते ही पेशेंट को स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। इसे डायग्नोस करने के लिए एमआरआई सबसे बेहतर है। �ऑपरेशन से गांठें निकाल कर भी सुन्नपन, कमजोरी और लकवे को ठीक किया जा सकता है। माइक्रोस्कोपिक सर्जरी से गांठ पूरी तरह निकाल दिया जाता है। नॉर्मल ट्यूमर निकाल देने पर दुबारा नहीं आता है। जबकि कैंसर की गांठ रिपीट हो सकती है।
-डॉ. सीबी सहाय, न्यूरो एक्सपर्ट, रांची
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