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1 Mart 2019 Cuma

पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में फरवरी माह में पांच दिन दिखे बाघ, नार्थ डिवीजन में लगे 456 कैमरे

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पलामू. पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में बीते फरवरी माह में पांच अलग-अलग दिन बाघ दिखे। टाइगर प्रोजेक्ट में सेंसर के लिए लगे कैमरे में अलग-अलग क्षेत्र में बाघ को देखा गया। इसमें टाइगर प्रोजेक्ट का गारु और छीपाहोदर रेंज में बाघ को देखा गया है। इसमें सुरक्षा के लिहाज से स्थल का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके पहले पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में 22 फरवरी 18 को बाघ को देखा गया था।

पलामू प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर ने दी जानकारी
इसकी पुष्टि करते हुए पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के सीसीएफ सह फील्ड डायरेक्टर वाइके दास ने बताया कि पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में 17 फरवरी को छीपादोहर, 22 फरवरी को गारु, 26, 27 फरवरी को छीपादोहर रेंज में लगे कैमरे में बाघ की गतिविधि को कैद किया गया है। उन्होंने बताया कि बाघों की निगरानी के लिए मानूसन अवधि में साउथ डिवीजन में 486 कैमरा लगाया गया था। वहीं, मानसून के बाद से नार्थ डिवीजन में 456 कैमरे लगाए गए हैं। इसी कैमरे में बाघ को देखा गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक 2 वर्ग किमी. में एक ग्रिड बनाया गया है तथा प्रत्येक ग्रिड में दो कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि टाइगर प्रोजेक्ट के तहत गारु पश्चिमी और बेतला रेंज में 110 स्केट (मल) एकत्र कर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून जांच के लिए भेजा गया लेकिन एक भी स्केट बाघ का नहीं निकला। वहीं, गारू पूर्वी, छीपादोहर पूर्वी, छीपादोहर पश्चिमी, महुआडांड़, बारेसाढ़ रेंज में स्केट (मल) एकत्र करने का कार्य शुरु होगा। उसके बाद उसकी जांच होगी। उन्होंने बताया कि कैमरे में दिखे बाघ को देखकर स्पष्ट नहीं कह सकते कि सब बाघ एक ही है या अलग-अलग। उन्होंने कहा कि स्केट जांच में ही बाघ का डीएनए का पता चलता है। इससे पता चलेगा कि बाघ एक है या अलग अलग है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के शोध सहायकों से ली जानकारी
पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के सीसीएफ सह फील्ड डायरेक्टर वाइके दास ने शुक्रवार को भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के शोध सहायकों के साथ बैठक की। प्रोजेक्ट मुख्यालय में आयोजित बैठक में बताया गया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के शोध सहायक इंद्रनील पॉल, सुमित शाह "टाइगर री इंट्रोडक्शन एंड प्री आगुमेटेशन' का फिजिकल स्टडी करने के लिए एक साल के कार्यक्रम के तहत आए है। जिनका कार्य अवधि फरवरी 18 से फरवरी 19 था। उनके द्वारा बीते एक साल तक पलामू टाइगर प्रोजेक्ट में उक्त विषय पर किए गए शोध की जानकारी ली और उक्त शोध के आधार पर टाइगर सेंसर के लिए आसान सिस्टम डेवलपमेंट करने पर विचार-विमर्श किया गया। मौके पर जियोग्राफी इंफारमेंशन सिस्टम एक्सपर्ट मनीष कुमार, फील्ड बॉयोलॉजिस्ट संजय खाखा मौजूद थे।



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Palamu Tiger seen five days in month of February in Tiger Project
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