{content: महात्मा गांधी के विचार और दर्शन की बात सभी करते हैं। लेकिन झारखंड में टाना भगत एक ऐसा आदिवासी समुदाय है जिसने गांधीयन थॉट को अपने ढंग से अपना लिया है। सात जिलों में 50000 से अधिक की संख्या में रहने वाले ये टाना भगत गांधी जी से प्रभावित एक पंथ जैसा ही हो गया है। इनकी हर सुबह तिरंगे की पूजा के साथ शुरू होती है। ऐसा वे सालों से कर रहे हैं। टाना भगतों के लिए काम कर रहीं डॉ. सुनीता गुप्ता कहती हैं कि बेड़ो में महात्मा गांधी बीसवीं सदी के दूसरे दशक में तीन दिन के लिए आकर रुके थे। लेकिन, उनकी स्वच्छता, साफ-सफाई को झारखंड के टाना भगतों ने जो अपनाया, तो उसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी ने आज तक जिंदा रखा है। पूर्ण रूपेण शाकाहार अपनाए ये समुदाय आदतन गांधी टोपी और सफेद वस्त्र पहनते हैं। इनकी सादगी, सफाई, सच्चाई, शाकाहार और प्रेम-अहिंसा से ही धरती को बचाया जा सकता है। मौसम कोई भी हो बदन पर सिर्फ एक धोती। सब्जी हो या अनाज वे बाजार से खरीदना पसंद नहीं करते। व्यवहार से बिगा आज भी युवा हैं और गांधीवादी विचारधारा उनमें िजंदा है।
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