रांची. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य के विभिन्न नगर निकाय क्षेत्र के स्लम में रहनेवाले लोगों को सरकार सस्ते दर पर बना-बनाया आवास (जी प्लस थ्री) मुहैया कराएगी। इसी तरह वैसे लोगों को भी सस्ते दर पर आवास मुहैया कराएगी, जिन्हें देश में कहीं भी घर नहीं है, पर वे शहर में रहना चाहते हैं। इसके लिए सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की जमीन पर पीपीपी मोड में सरकार घर बनवाएगी। यह फैसला मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में ली गई।
बिल्डर का चयन बिडिंग के माध्यम से होगा
निर्मित आवास में 55 फीसदी हिस्सेदारी सरकार की होगी और 45 फीसदी बिल्डर की। बिल्डर का चयन बिडिंग के माध्यम से होगा। नगर विकास विभाग द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार राज्य के विभिन्न नगर निकाय क्षेत्रों में लगभग 53000 लोग स्लम में रहते हैं जबकि बेघरों की संख्या 74000 है।
स्लम में रहनेवालों को इस तरह मिलेगा आवास
एक अनुमान के तहत जी-प्लस थ्री मल्टी स्टोरी में एक यूनिट आवास के निर्माण पर लगभग 7.5 लाख रुपए की लागत आने का अनुमान है। इसमें एक लाख केंद्र और एक लाख रुपए राज्य सरकार का अनुदान होगा। फिर बिल्डर द्वारा दी जानेवाली 55 फीसदी की हिस्सेदारी से प्रति यूनिट लगभग चार लाख रुपए की कमी आएगी। शेष बची लगभग 1.5 लाख रुपए की राशि लाभुक को देना होगा।
बेघर को इस तरह मिलेगा आवास
देश के किसी हिस्से में जिनका घर नहीं है, उन्हें अपने पैतृक अंचल के राजस्व कर्मी से प्रमाण पत्र देना होगा। उनके पास वोटर आई कार्ड, बैंक अकाउंट का होना अनिवार्य होगा। प्रति यूनिट आवास के निर्माण पर यहां भी 7.5 लाख रुपए की लागत आने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें केंद्र डेढ़ लाख और राज्य सरकार एक लाख अनुदान देगी। शेष बची लगभग पांच से छह लाख रुपए का भुगतान लाभुक को करना होगा।
कुछ प्रमुख बिंदू
दोनो ही कैटोगोरी में एक यूनिट आवास का क्षेत्रफल 270-300 वर्गफीट होगा। इसमें एक बेड, एक ड्राइंग रूम, एक किचन और एक लैट्रिन बाथरूम होगा। उन्हीं को आवास मिलेगा, जो 15 जून 2015 के पूर्व से झारखंड में रह रहे हों। किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ नहीं लिया हो। सरकार लोन दिलाने में मदद करेगी। आवास की रजिस्ट्री मात्र एक रुपए में होगी। उन्हें अलग से कोई मार्गेज नहीं रखना होगा। हां ऋण चुकता होने तक या 15 साल तक वह आवास की बिक्री नहीं कर सकेंगे। बिडिंग में आवास की कीमत में थोड़ी कमी या बढोत्तरी हो सकती है। उसी अनुरूप लाभुक द्वारा दी जानेवाली राशि अंतिम रूप में तय होगी। बेघरों के लिए आवास निर्माण के लिए रांची और धनबाद में नगर आयुक्त की अध्यक्षता में और अन्य जिलों में डीसी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन होगा।
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