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6 Nisan 2019 Cumartesi

कविताअाें में शामिल है जिंदगी की लय अाैर प्रवाह : अशोक प्रियदर्शी

{content: नदी को सोचने दो और मन हुआ पलाश के बाद कविता की युवा दखल रश्मि शर्मा के तीसरे काव्य संग्रह वक्त की अलगनी पर का लोकार्पण शनिवार को रांची प्रेस क्लब में हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक प्रियदर्शी ने कहा कि जिंदगी का अनिवार्य शर्त लय है। रश्मि की कविताओं में लय है, प्रवाह है। संवेदनाओं से लबरेज इनकी रचनाएं सहज ही पाठक पर असर डालतीं हैं। आयोजक संस्था शब्दकार की सूत्रधार और कवयित्री बीना श्रीवास्तव ने कहा कि बकौल धूमिल रश्मि की कविताएं भी आदमी होने की तमीज बताती हैं। अपने आलेख पाठ में डॉ. माया प्रसाद बोलीं- आज की कवयित्री महिलाओं के लिए सदियों से रहीं बंदिशों के किले को तोड़ती हैं। बिना किसी लाग-लपेट की अपनी बात रखतीं हैं। वरिष्ठ लेखक-कवि विद्याभूषण ने कहा कि रश्मि के संकलनों में अभिव्यक्ति का विस्फोट है। प्रेम बार-बार लौटकर इनके यहां आता है। प्रमुख वक्तव्य देते हुए अालोचक भारत यायावर ने कहा कि रश्मि की कविताएं घोषित स्त्रीवाद से परहेज करती हैं। घर, परिवार, प्रकृति और प्रेम के प्रति इनकी गहरी आस्था है। प्रसंग पत्रिका के संपादक व कवि शंभु बादल का कहना रहा कि लोकार्पित संग्रह में शब्द सार्थक से लगते हैं। कवि नीलोत्पल रमेश के विचार में रश्मि जीवन की रचनाकार हैं। जबकि, आत्म-वक्तव्य में रश्मि ने कहा कि कविता उनकी आदत भी है और जरूरत भी। वो बिना लिखे नहीं रह सकती हैं। संचालन करते हुए शहरोज ने कहा कि रश्मि के काव्य संसार में प्रकृति जहां इठलाती है, वहीं इंसानी रिश्ते की बहार चलती रहती है। आभार ज्ञापन नीरज नीर ने किया। लोकार्पित किताब का प्रकाशन दिल्ली के अयन प्रकाशन ने किया है।

कवियों ने कहा- आज की महिलाएं सदियों से रहीं बंदिशों के किले को तोड़ती हैं

पुस्तक का विमोचन करते डॉ. अशोक प्रियदर्शी, रश्मि शर्मा व अन्य।

मोमेंटो से सम्मानित किए गए अतिथि साहित्यकार: समारोह में शब्दकार की ओर से अतिथियों का फूल के गमले और मोमेंटो देकर सम्मान किया गया। वहीं विनोद कुमार, रेणु मिश्रा, संगीता कुजारा टाक, राजीव थेपड़ा, सोनल थेपड़ा, नंदा पांडेय और मुक्ति शाहदेव आदि ने रश्मि की अलग-अलग कविता का पाठ किया। कार्यक्रम का दयानंद शर्मा, आदर्श कुमार, अभिरूप, आशुतोष प्रसाद, धर्मराज राय, सुनील बादल, मृणालिनी अखौरी, दीप्ति भगत, रेणु झा, असित कुमार, शुभारंभ महज पांच साल की आद्या की सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम में पीके झा, हरेराम चेतन, पूर्व जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद, निहाल सरय्यावी, नसीर अफसर, दिलशाद नज्मी, एस मृदुला, चंद्रिका ठाकुर, शिल्पी कुमारी, संध्या चौधरी, पंकज कुमार, सत्य प्रकाश पाठक, पांडेय रजनीश आनंद, राजश्री जयंती, नंदिनी प्रणय आदि उपस्थित थे।



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