रांची. 19 से 21 फरवरी तक रायपुर में आयोजित अंडर-18 नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में खेलने के लिए बिशप हार्टमैन के रामचंद्र सांगा ने मैट्रिक का एग्जाम नहीं दिया। क्योंकि, उन्हें एथलेटिक्स में करियर बनाना था। सांगा का यह निर्णय सही साबित हुआ आैर वो भारतीय एथलेटिक्स टीम में जगह बना ली। सांगा ने रायपुर में सिल्वर मेडल जीतकर सेलेक्टरों को अपनी ओर खींचकर भारतीय टीम में जगह पक्की की। रांची के सांगा अब 400 मीटर दौड़ में भारतीय टीम की अोर से हॉन्ग-कॉन्ग में आयोजित एशियन यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने के लिए दौड़ेंगे।
पिता खेती और राज मिस्त्री का करते हैं काम
सांगा के पिता रौशन खेतीबाड़ी का काम करते हैं। साथ ही राज मिस्त्री भी हैं। तीन भाई आैर दो बहनों में सांगा सबसे छोटा है। सांगा के बड़े भाई राजेश सांगा वकील हैं। सारी जिम्मेवारी इन्हीं के कंधों में है। राजेश ने बताया कि स्कूल के समय से ही खेल से लगाव था। मैंने वकालत की। इसके बाद कुछ स्थिती घर की ठीक हुई। पूरा गांव व घर के लोग बहुत खुश है।
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