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शहर के कई वरिष्ठ और कुछ युवा रंगकर्मी शुक्रवार को दैनिक भास्कर के कार्यालय में जुटे। राज्य में थिएटर की स्थिति और इसकी बेहतरी के लिए जरूरी सुविधाओं पर चर्चा की। रंगकर्मियों ने कहा कि ये पल उनके लिए खास हैं, क्योंकि शायद पहली बार किसी अखबार के कार्यालय में वे इतनी बड़ी संख्या में जुटे हैं। इस मौके पर सभी ने खुल कर मन की बात कही। बातों में रंगकर्मियों का मंच के पीछे का दर्द छलक रहा था। एक मांग, जो सबकी रही.. \"भास्कर के मंच पर हमारी सरकार से अपील है कि शहर में जरूरी सुविधाओं से लैस एक रंगशाला और रंगकर्मियों को रिहर्सल करने के लिए जगह मुहैया कराए। ताकि दूसरे राज्यों की तरह हम भी थिएटर और इसकी गुणवत्ता कायम रख सकें।\'
रंग कर्मियों के मन की बात.. विस्तृत पेज 2 पर
खानापूर्ति के लिए नाटक न करें, इससे कलाकारों का मान घटेगा
नाटक की कमी नहीं है। हमारे पास कई नाटक हैं, पर किसे दें और कहां कराएं। जो नाटक पसंद है. वह कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि प्रस्तुति अच्छी होनी चाहिए। खानापूर्ति के लिए नाटक न करें। नाटक करें तो अच्छे मंच व गंभीरता से। ताकि रंगमंच और कलाकारों का मान बना रहे।
अशोक पागल
रंगकर्मियों के लिए कल्याण संघ बन रहा, जरूरत में मदद मिलेगी
समस्याएं हमेशा रहेंगी। इससे लड़ते हुए रंगमंच को फिर से लोगों के बीच लेकर आना है। रंगकर्मियों को एकजुट होकर रहना चाहिए। हम रंगकर्मियों के लिए एक कल्याण संघ बनाने की प्रक्रिया में हैं। ताकि जरूरत में सभी को मदद मिल सके। हम सरकार से रंगकर्मियों के इंश्योरेंस की भी बात करेंगे।
सुशील अंकन
सरकार सनि परब तो करा रही है, लेकिन वहां थिएटर के लिए उचित मंच ही नहीं है
सबसे बड़ी कमी रंगशाला की है। परफॉर्म करने की जगह नहीं है। रांची में रंगकर्मियों का लंबा इतिहास रहा है। सरकार सनि परब करा रही है, लेकिन वहां थिएटर का मंच है ही नहीं। शहर में थिएटर के लिए जो हॉल हैं, उनकी स्थिति ठीक नहीं। जो बेहतर हैं, वहां की फीस बहुत ज्यादा है।
राकेश रमण
RANCHI, SATURday, 02/03/2019
ऑड्रे हाउस का एक दिन का चार्ज 12000 पर कपड़े बदलने के लिए ग्रीन रूम भी नहीं
25 वर्षों से नाटक कर रही हूं। रांची में रंगशाला की बड़ी कमी है। कई लोग रंगमंच से जुड़कर अच्छे नाटक करना चाहते हैं। पर कहां करें? कई बार मजबूरी में घर में रिहर्सल करना पड़ता है। ऑड्रे हाउस का एक दिन का चार्ज 12 हजार है। पर कपड़े बदलने के लिए यहां ग्रीन रूम तक नहीं।
रीमा सहाय
दैनिक भास्कर कार्यालय में शहर के रंगकर्मी।
सनि परब में जिस स्तर का मंच है, उससे नाटक व कलाकारों का मजाक बन रहा है
सनि परब में नाटक का मजाक बन रहा है। 10-12 लोगों के दल को 15000 रु. मिलते हैं। वो भी महीनों बाद। महीने में एक ही नाटक करवाएं, पर पूरी तैयारी से। एक दल को अच्छे पैसे और दर्शकों को अच्छा नाटक तो मिलेगा। जिसमें अच्छे साउंड, लाइट, मंच सज्जा का ध्यान रखा गया हो।
मोनिता सिन्हा
रंगकर्मियों की सरकार से मांग... सुविधाओं से लैस एक थिएटर और प्रैक्टिस की जगह दें
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