{content: रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह द्वारा रिम्स की व्यवस्था में सुधार के लिए दिए जा रहे निर्देशों से रिम्स डॉक्टरों ने आक्रोश जताया। इसे लेकर शुक्रवार को 1 बजे रिम्स के टेलीमेडिसिन हॉल में रिम्स डॉक्टर्स एसोसिएशन की बैठक हुई। डॉक्टरों ने कहा कि निदेशक द्वारा आए दिन जारी किए जा रहे तुगलकी फरमान से परेशान हो गए हैं। निदेशक मरीज को तो सही खाना दे नहीं पा रहे हैं, कहते हैं डॉक्टरों को भी रिम्स किचन का खाना मिलेगा। दोपहर में कोई भी डॉक्टर घर का खाना नहीं खाएंगे। वरीय डॉक्टरों ने साफ कहा कि उम्र 60-65 हो गई है। यदि यही हाल रहा तो वीआरएस ले लेंगे। बैठक में डॉ. जेके मित्रा, डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. अशोक प्रसाद, डॉ. आरके सिंह, डॉ. सीएस प्रसाद, डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. केपी सिन्हा, डॉ. सरिता तिर्की, डॉ. धर्मेंद्र मिश्रा व डॉ. निशिथ एक्का समेत दर्जनों चिकित्सक उपस्थित थे।
फरमान का विराेध
नियमावली के अनुसार ही करेंगे काम
डॉक्टरों ने कहा कि रिम्स के संचालन की नियमावली बनी हुई है, उसी के अनुसार काम होगा। नियमावली में कार्य अवधि का भी उल्लेख है, जिसके अनुसार सुबह 9 से 1 बजे और शाम में 3 से 5 बजे तक कार्य अवधि निर्धारित है। लेकिन, निदेशक फरमान जारी करते हैं कि डॉक्टर सुबह 9 से शाम 5 बजे तक रिम्स में रहेंगे। बैठक में यह बात भी उठी कि निदेशक के फरमान के कारण गुरुवार को सात मरीजों का ऑपरेशन टल गया। डॉक्टर किसी भी सूरत में मरीजों को परेशान नहीं करना चाहते हैं। जरूरी संसाधन न रहते हुए भी डॉक्टर मरीजों को भरपूर इलाज कर रहे हैं, जिसका परिणाम है कि रिम्स में लगातार मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। लेकिन, निदेशक मरीजों बेहतर चिकित्सा के लिए व्यवस्था सुदृढ़ करने की बजाए केवल तुगलकी फरमान जारी करने में लगे हैं। डॉक्टरों ने निर्णय लिया कि डॉक्टरों को जानबूझ कर तंग किया गया तो सामूहिक वीआरएस लेंगे।
कॉर्निया ट्रांसप्लांट, दो और नेत्रहीन देख सकेंगे दुनिया
रांची | रिम्स में शुक्रवार को भी एक बुजुर्ग सुदेश प्रसाद (बदला नाम) और जानकी कुमारी (बदला नाम) का कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया। बताते चलें कि तैमारा घाटी में एक्सीडेंट के बाद 30 वर्षीय अवध प्रसाद को इलाज के लिए रिम्स लाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने मृतक के पिता से संपर्क कर उन्हें कॉर्निया डोनेट करने को लेकर बात की। पिता डोनेशन के लिए तैयार हो गए। डॉ.अभिमन्यु ने बताया कि पूर्व प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ निधि खरे के प्रयास से आई बैंक की शुरुआत हुई।
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